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GA Topper Series: आरबीआई वार्षिक रिपोर्ट

Mandate: आरबीआई अधिनियम 1935 की धारा 53 (2) के तहत आरबीआई के गवर्नर, वित्त सचिव को आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट की एक प्रति (a copy of the RBI annual report) भेजते हैं और यह स्थानांतरण, संचारण पत्र (letter of transmittal) के माध्यम से किया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts):

प्रस्तुत रिपोर्ट में इस बात की जानकारी प्रदान की गयी है कि आरबीआई ने पिछले एक वर्ष में क्या किया है। अतः बैंकिंग अथवा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों/उम्मीदवारों को तथ्यों और आंकड़ों पर ध्यान देने की ज़रूरत है।

  • वित्तीय वर्ष 2020-21 से  रिज़र्व बैंक के लिए लेखा वर्ष (accounting year) को अप्रैल-मार्च (जो पहले जुलाई-जून हुआ करता था) में बदल दिया गया था। यह सिफारिश आर्थिक पूंजी ढांचा समिति (Economic Capital Framework Committee (ECF)) द्वारा सुझाई गई थी, जिसकी अध्यक्षता डॉ. बिमल जालान ने की थी।
  • विकट और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, भारत का व्यापारिक निर्यात 2021-22 के दौरान 421.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड को छू गया, इसमें पूर्व-महामारी के स्तर से 16.6 प्रतिशत का विस्तार/वृद्धि हुआ।
  • वित्तीय प्रणाली के अन्य क्षेत्रों में एनबीएफसी के बढ़ते परस्पर संबंध (interconnectedness) के साथ, रिज़र्व बैंक ने 22 अक्टूबर, 2021 को एनबीएफसी के लिए स्केल-आधारित विनियमों पर दिशानिर्देश ज़ारी किए। रिज़र्व बैंक ने एनबीएफसी के लिए त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (prompt corrective action (PCA)) ढांचे का विस्तार करने के लिए 14 दिसंबर, 2021 को दिशा-निर्देश भी ज़ारी किए हैं। यह ढांचा प्राइमरी डीलरों, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और उन एनबीएफसी को छोड़कर, जो सार्वजनिक धन स्वीकार नहीं कर रही हैं, मध्य, ऊपरी और शीर्ष स्तर की सभी ग़ैर-सरकारी एनबीएफसी पर लागू होगी। इन उपायों से एनबीएफसी की वित्तीय स्थिति मज़बूत होगी।
  • रिज़र्व बैंक का वित्तीय समावेशन सूचकांक (Financial Inclusion Index – FIIndex) 97 संकेतकों पर तैयार किया गया है, जो पहुंच में आसानी, उपलब्धता, सेवाओं के उपयोग और सेवाओं की गुणवत्ता को दर्शाता है। मार्च 2021 के अंत तक, सूचकांक का मान/मूल्य 53.9 (जो मार्च 2017 के अंत में 43.4 था) तक पहुंच गया, जो अब और भी आगे जाने का संकेत देता है।
  • देश में 40 करोड़ से अधिक फीचर फोन उपयोगकर्ताओं की डिजिटल सक्षमता की सुविधा हेतु UPI123Pay को पेश करने के लिए UPI प्रणाली का लाभ उठाया गया था।
  • पेमेंट्स इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (Payments Infrastructure Development Fund (PIDF)) ने पूरे देश में डिजिटल भुगतान स्वीकृति को विस्तार करने में मदद की, सिर्फ़ 2021 में 85 लाख से अधिक भुगतान टच पॉइंट तैनात किए गए।
  • भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (Clearing Corporation of India Limited (CCIL)) और राष्ट्रीय स्वचालित समाशोधन गृह (National Automated Clearing House (NACH)) के संचालन ने भुगतान स्थान में ऋण और निपटान जोखिम को कम करने में मदद की।
  • वर्ष के दौरान रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) भी स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य नियामक डोमेन और राष्ट्रीय सीमाओं में फैले क्रॉस-थिंकिंग को बढ़ावा देना तथा प्रोटोटाइप, पेटेंट और अवधारणा के प्रमाण (Proofs of concept) के विकास के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना था।
  • रिज़र्व बैंक ने नवंबर 2021 में ‘एक राष्ट्र एक लोकपाल (One Nation One Ombudsman)’ दृष्टिकोण अपनाते हुए एक एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 (Integrated Ombudsman Scheme, 2021) शुरू की। रिज़र्व बैंक ने भौतिक और ई-मेल शिकायतों के प्रारंभिक प्रसंस्करण के लिए एक केंद्रीकृत रसीद और प्रसंस्करण केंद्र (Centralized Receipt and Processing Centre (CRPC)) की स्थापना की। इसके अलावा, रिज़र्व बैंक ने अपने वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र के बारे में शिकायतकर्ताओं को सूचना/सहायता प्रदान करने के लिए अब तक का पहला संपर्क केंद्र स्थापित किया है। पात्र एनबीएफसी के लिए आंतरिक लोकपाल तंत्र का विस्तार किया गया।
  • केंद्रीय बजट 2021-22 में की गई घोषणा के अनुसरण में ऐतिहासिक क़ानून, जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (DICGC) अधिनियम 1961 में 13 अगस्त, 2021 को संशोधन किया गया था। यह संशोधन 1 सितंबर, 2021 को लागू हुआ, जिसके अंतर्गत डीआईसीजीसी (DICGC) को इन निर्देशों को लागू करने की तारीख से 90 दिनों के भीतर जमाकर्ताओं को बीमा राशि तक भुगतान करने का अधिकार दिया गया है, तथा बैंकों के मामले में रिज़र्व बैंक द्वारा लगाए गए जमा की निकासी पर प्रतिबंध है।
  • एमपीसी (MPC) ने अपने अप्रैल के प्रस्ताव में 2022-23 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि को संशोधित कर 7.2 प्रतिशत कर दिया – अर्थात युद्ध पूर्व के अनुमान से 60 बेसिक अंकों की गिरावट, यह मुख्य रूप से निजी खपत पर तेल की ऊंची कीमतों और शुद्ध निर्यात को कम करने वाले उच्च आयात के कारण हुआ है।
  • नकद आरक्षित अनुपात (cash reserve ratio (CRR)) को 50 बीपीएस (bps) से बढ़ाकर 4.50 प्रतिशत की वृद्धि की गयी, जो 21 मई, 2022 से शुरू होने वाले फोर्टनाईट से प्रभावी होगा, यह बैंकिंग प्रणाली से 87,000 करोड़ रुपये की लिक्विडिटी को वापस ले लेगा।
  • “एमएसएमई उधार (MSME Lending)” और “वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम और शमन” पर नियामक सैंडबॉक्स के तीसरे और चौथे समूह के तहत संस्थाओं के परीक्षण और मूल्यांकन के साथ-साथ हैकथॉन हार्बिंगर 2021 के परिणामों से वित्तीय क्षेत्र के लिए अभिनव समाधान (innovative solutions) प्रदान करने की उम्मीद है।
  • वित्तीय शिक्षा के लिए राष्ट्रीय रणनीति (National Strategy for Financial Education (NSFE)): 2020-25 का उद्देश्य वित्तीय रूप से जागरूक और सशक्त भारत के दृष्टिकोण को साकार करना है। देश के लोगों को पर्याप्त ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण और व्यवहार विकसित करने में मदद करके जो उनके पैसे को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और भविष्य की योजना बनाने के लिए आवश्यक हैं।
  • साल 2021- 22 में, “गो डिजिटल, गो सिक्योर (Go Digital, Go Secure)” विषय पर 14-18 फरवरी, 2022 के दौरान वित्तीय साक्षरता सप्ताह मनाया गया।
  • ‘सारथी एप्लिकेशन’ का स्थायीकरण (Stabilization of Sarthi Application)- रिजर्व बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं के लिए कागज़ विहीन समाधान ‘सारथी’ को 1 जनवरी, 2021 को लॉन्च किया गया था।
  • घरेलू भुगतान लेनदेन के प्रसंस्करण में आईएमपीएस (IMPS) के महत्व को ध्यान में रखते हुए, SMS और IVRS (₹5 हजार) के अलावा अन्य सभी चैनलों के लिए प्रति लेनदेन सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई।
  • रिज़र्व बैंक के मार्गदर्शन में, एनपीसीआई ने भुगतान उद्योग के सहयोग से डिजिटल भुगतान के लिए एक केंद्रीकृत उद्योग-व्यापी 24×7 हेल्पलाइन की स्थापना की जिसका नाम डिजी साथी (DigiSaathi) है।
  • रिज़र्व बैंक की पूर्ववर्ती लोकपाल योजनाओं का 12 नवंबर, 2021 से आरबी-आईओएस में विलय कर दिया गया है। ऐसी दो शिकायतें हैं जो आरबी-आईओएस (RB-IOS) के अंतर्गत नहीं आती हैं: (i) आरबी के तहत शामिल नहीं होने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायतें- आईओएस (IOS) (यानी, ऐसी गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक जिनकी जमा राशि ₹50 करोड़ से कम है, एनबीएफसी जिनका परिसंपत्ति आकार ₹100 करोड़ से कम है, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान, क्रेडिट सूचना कंपनियां, आदि), जो देश भर में रिज़र्व बैंक के आरओ (RO) में स्थापित उपभोक्ता शिक्षा और संरक्षण प्रकोष्ठों (Consumer Education and Protection Cells (CEPCs)) द्वारा नियंत्रित की जाती हैं; और (ii) आरबी-आईओएस (RB-IOS) की अपवर्जन सूची में आने वाली शिकायतें (यानी प्रबंधन, नीति संबंधी मामलों आदि के विरुद्ध शिकायतें) हैं।

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