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Ministry of Co-operation: केंद्र सरकार ने किया नये सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Co-operation) का गठन – करेंट अफेयर्स स्पेशल सीरीज

GOI Ministry of Co-operation: भारत सरकार ने हाल ही में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक अलग और नए मंत्रालय ‘सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Co-operation)’ का गठन किया है। यह मोदी सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ (Sahkar se Samriddhi) के विजन को साकार करेगी। सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Co-operation) देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए एक अलग प्रशासनिक, कानूनी और नीतिगत ढांचा प्रदान करेगा।

अमित शाह, गृह मंत्रालय के साथ इस नवगठित सहकारिता मंत्रालय को संभालेंगे

सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए:

केंद्र सरकार ने समुदाय आधारित विकासात्मक भागीदारी के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता का संकेत संकेत देते हुए सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Co-operation) का गठन किया गया हैं। नए सहकारिता मंत्रालय का गठन इस वर्ष वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण में की गई बजट घोषणा को भी पूरा करता है। यह सहकारी समितियों को जमीनी स्तर तक पहुंचने वाले एक सच्चे जनभागीदारी आधारित आंदोलन को मजबूत बनाने में भी सहायता प्रदान करेगा।

सहकारिता का अर्थ ( Meaning of Co-operatives:):

  • एक सहकारी व्यक्तियों का एक संघ है जो संयुक्त रूप से स्वामित्व वाले और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उद्यमों के माध्यम से अपनी सामान्य, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वेच्छा से एकजुट होते हैं।
  • सहकारी आंदोलन स्वैच्छिक और खुली सदस्यता के सात बुनियादी सिद्धांतों लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण, सदस्य आर्थिक भागीदारी, स्वायत्तता और स्वतंत्रता, शिक्षा, प्रशिक्षण और सूचना, सहकारी समितियों के बीच सहयोग, और समुदाय के लिए चिंता पर आधारित हैं।

इसके अलावा, सहकारी समितियां सामान और सेवाएं प्रदान करने और समाज के कमजोर सदस्यों के शोषण को रोकने और उपभोक्ताओं और उत्पादकों दोनों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए काम कर रही हैं।

बहु-राज्य सहकारी समितियां (MSCS):

सहकारिता मंत्रालय बहु-राज्य सहकारी समितियों के विकास का लक्ष्य रखता है। मंत्रालय सहकारिताओं के लिए व्यवसाय करने में आसानी के लिए प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करने और बहु-राज्य सहकारी समितियों (एमएससीएस) के विकास को सक्षम बनाने के लिए काम करेगा।

वर्तमान में बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन और लोकतांत्रिक कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए सहकारी समितियों से संबंधित कानून को संयोजित और संशोधित करता है।

सहकारी आधारित आर्थिक विकास:

भारत में सहकारिता आंदोलन 19वीं शताब्दी के शुरुआत में किसानों को हुई आर्थिक तंगी के परिणामस्वरूप शुरू हुआ था। वास्तविक सहकारी आंदोलन 1904 के सहकारी ऋण समिति अधिनियम के पारित होने के साथ शुरू हुआ था। सहकारी आंदोलन का उद्देश्य सहकारी समितियों को मजबूत बनाना, उनके कामकाज और सामाजिक और आर्थिक मानकों में सुधार करना था।

भारत में, सहकारी समितियाँ समाजों के आर्थिक उत्थान में मदद करने के लिए काम करती रही हैं। सहकारी समिति के सभी सदस्य मिलकर उनके विकास के लिए कार्य करते हैं। सहकारी आधारित आर्थिक गतिविधियाँ सदस्यों को स्वयं सहायता संचालन, कृषक समुदायों, कृषि उपज के विपणन की व्यवस्था आदि करने में मदद करती हैं। यहाँ तक कि यह समाज के समग्र विकास में भी मदद करती है।


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